Thursday, April 20, 2017

रुद्राभिषेक से करें शि‍व जी को प्रसन्न, करेंगे हर इच्छा पूरी

महादेव को प्रसन्न करने का रामबाण उपाय है रुद्राभिषेक. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो सही समय पर रुद्राभिषेक करके आप शिव से मनचाहा वरदान पा सकते हैं. क्योंकि शिव के रुद्र रूप को बहुत प्रिय है अभिषेक तो आइए जानते हैं, रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण....
रुद्राभिषेक की महिमा

भोलेनाथ सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है. कहते हैं कि रुद्राभिषेक से शिव जी को प्रसन्न करके आप असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं तो आप भी सही समय पर रुद्राभिषेक करिए और शिव कृपा के भागी बनिए...
- रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं.
- शिव जी की कृपा से सारे ग्रह बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है.
-शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है.
- रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ करते हैं.
- सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है.
- रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं.
- रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे उत्तम उपाय है.
कौन से शिवलिंग पर करें रुद्राभिषेक?
अलग –अलग शिवलिंग और स्थानों पर रुद्राभिषेक करने का फल भी अलग होता है. कौन से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना ज्यादा फलदायी होता है...

- मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना बहुत उत्तम होता है.
- इसके अलावा घर में स्थापित शिवलिंग पर भी अभिषेक कर सकते हैं.
- रुद्राभिषेक घर से ज्यादा मंदिर में, नदी तट पर और सबसे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी होता है.
- शिवलिंग न हो तो अंगूठे को भी शिवलिंग मानकर उसका अभिषेक कर सकते हैं.
अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक करने का फल
रुद्राभिषेक में मनोकामना के अनुसार अलग-अलग वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है. ज्योतिष मनाते हैं कि जिस वस्तु से रुद्राभिषेक करते हैं उससे जुड़ी मनोकामना ही पूरी होती है तो आइए जानते हैं कि कौन सी वस्तु से रुद्राभिषेक करने से पूरी होगी आपकी मनोकामना...
- जल की धारा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, अत: शुद्ध जल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर भरपूर जलवृष्टि होती है। जल से अभिषेक करने से तेज ज्वर से भी शांत हो जाता है।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से भगवान का अभिषेक करना चाहिए।
- गाय के दूध से अभिषेक करने पर नि:संतानों को संतान प्राप्त होती है।
- शक्कर ‍‍‍मिश्रित दूध से अभिषेक करने पर बुद्धि की जड़ता समाप्त हो जाती है और बुद्धि श्रेष्ठ होती है।
- शहद से अभिषेक करने पर पापों का नाश हो जाता है। तपेदिक रोग से छुटकारा मिलता है।
- घी से अभिषेक करने पर जीवन में आरोग्यता आती है और वंशवृद्धि होती है।
- सरसों के तेल के भगवान का ‍अभिषेक करने पर शत्रुओं का नाश होता है।
- मोक्ष की कामना के लिए तीर्थों के जल द्वारा अभिषेक किया जाता है।
- इक्षुरस से अभिषेक करने से दुर्योग नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
- शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से इंसान विद्वान हो जाता है.
- शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं.
- गाय के दूध से अभिषेक करने से आरोग्य मिलता है.
- शक्कर मिले जल से अभिषेक करने से संतान प्राप्ति सरल हो जाती हैं.
- भस्म से अभिषेक करने से इंसान को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
- कुछ विशेष परिस्थितियों में तेल से भी शिव जी का अभिषेक होता है.
इन रसों द्वारा शुद्ध चित्त के साथ विधानुसार भगवान शिव का अभिषेक करने पर भगवान भक्त की सभी कामनाओं की पूर्ति करते हैं।
रुद्राभिषेक कब होता है सबसे उत्तम?
कोई भी धार्मिक काम करने में समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. रुद्राभिषेक के लिए भी कुछ उत्तम योग बनते हैं. आइए जानते हैं कि कौन सा समय रुद्राभिषेक करने के लिए सबसे उत्तम होता है...
- रुद्राभिषेक के लिए शिव जी की उपस्थिति देखना बहुत जरूरी है.
- शिव जी का निवास देखे बिना कभी भी रुद्राभिषेक न करें, बुरा प्रभाव होता है.
- शिव जी का निवास तभी देखें जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक करना हो.
शिव जी का निवास कब मंगलकारी होता है?
देवों के देव महादेव ब्रह्माण्ड में घूमते रहते हैं. महादेव कभी मां गौरी के साथ होते हैं तो कभी-कभी कैलाश पर विराजते हैं. ज्योतिषाचार्याओं की मानें तो रुद्राभिषेक तभी करना चाहिए जब शिव जी का निवास मंगलकारी हो...
- हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी को शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं.
- हर महीने कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या को भी शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं.
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर वास करते हैं.
- शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर ही रहते हैं.
- कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिव जी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं.
- शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं.
- रुद्राभिषेक के लिए इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है.
शिव जी का निवास कब अनिष्टकारी होता है?
शिव आराधना का सबसे उत्तम तरीका है रुद्राभिषेक लेकिन रुद्राभिषेक करने से पहले शिव के अनिष्‍टकारी निवास का ध्यान रखना बहुत जरूरी है...
- कृष्णपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को भगवान शिव श्मशान में समाधि में रहते हैं.
- शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा को भी शिव श्मशान में समाधि में रहते हैं.
- कृष्ण पक्ष की द्वितीया और नवमी को महादेव देवताओं की समस्याएं सुनते हैं.
- शुक्लपक्ष की तृतीया और दशमी में भी महादेव देवताओं की समस्याएं सुनते हैं.
- कृष्णपक्ष की तृतीया और दशमी को नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं.
- शुक्लपक्ष की चतुर्थी और एकादशी को भी नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं.
- कृष्णपक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी को रुद्र भोजन करते हैं.
- शुक्लपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को भी रुद्र भोजन करते हैं.
- इन तिथियों में मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक नहीं किया जा सकता है.
कब तिथियों का विचार नहीं किया जाता?
कुछ व्रत और त्योहार रुद्राभिषेक के लिए हमेशा शुभ ही होते हैं. उन दिनों में तिथियों का ध्यान रखने की जरूरत नहीं होती है...
- शिवरात्री, प्रदोष और सावन के सोमवार को शिव के निवास पर विचार नहीं करते.
- सिद्ध पीठ या ज्योतिर्लिंग के क्षेत्र में भी शिव के निवास पर विचार नहीं करते.
- रुद्राभिषेक के लिए ये स्थान और समय दोनों हमेशा मंगलकारी होते हैं.
शिव कृपा से आपकी सभी मनोकामना जरूर पूरी होंगी तो आपके मन में जैसी कामना हो वैसा ही रुद्राभिषेक करिए और अपने जीवन को शुभ ओर मंगलमय बनाइए

aajtak.in [Edited by: वंदना यादव] नई दिल्ली, 28 March 2016

राशि के मुताबिक समस्याओं का समाधान

ज्योतिषी मानते हैं कि हर राशि के मुताबिक भगवान की पूजा से जुड़ी एक खास वस्तु होती है. इससे ईश्वर जल्दी प्रसन्न होते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि राशि के हिसाब किस तरह करें पूजा और पाएं अपनी समस्याओं का समाधान.

मेष राशिवालों के लिए :
- इनकी सबसे बड़ी समस्या मन की चंचलता है.
- हनुमान जी की उपासना से लाभ होगा.
- पूजा में लाल फूलों का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.

वृष राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या जिद्धी स्वभाव है.
- इसके लिए शिव जी की उपासना करें.
- पूजा में सफेद चन्दन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.

मिथुन राशिवालों के लिए :
- दुविधा में होना सबसे बड़ी समस्या है.
- श्री कृष्ण की पूजा करना सर्वोत्तम है.
- पूजा में गुग्गल की धूप का इस्तेमाल करने से लाभ होगा.

कर्क राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या है- ज्यादा भावनात्मक होना.
- शिव जी की उपासना करना शुभ होगा.
- पूजा में शंख का प्रयोग करें, इसे जरूर बजाएं.

सिंह राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या है- जीवन में ज्यादा संघर्ष होना.
- इसके लिए सूर्य देव की उपासना करें.
- आपको पूजा में रोली का प्रयोग जरूर करें.


कन्या राशिवालों के लिए :
- आपकी सबसे बड़ी समस्या है- जरूरत से ज्यादा धन के पीछे भागना.
- इसके लिए आपको देवी मां की आराधना करनी चाहिए.
- आपको पूजा में शुद्ध घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए.

तुला राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या है- लापरवाह होना.
- भगवान कृष्ण की उपासना करें.
- आपको पूजा में सफेद फूलों का प्रयोग करना लाभदायक होगा.

वृश्चिक राशिवालों के लिए :
- समस्या- जिंदगी का धीरे चलना.
- इसके लिए आपको हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए.
- पूजा में तुलसी का इस्तेमाल जरूर करें.

धनु राशिवालों के लिए :
- समस्या- आपकी वाणी.
- इसके लिए आपको सूर्य की उपासना जरूर करनी चाहिए.
- प्रसाद में सफेद मिठाई चढ़ाना शुभ होगा.

मकर राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या है- अपनी सेहत के प्रति लापरवाही.
- इसके लिए शिव जी की उपासना करें.
- पीले रंग के आसन पर बेठकर पूजा करना सर्वोत्तम होगा.

कुंभ राशिवालों के लिए :
- समस्या- जरूरत से ज्यादा दूसरों के चक्कर में रहना.
- भगवान कृष्ण की उपासना जरूर करनी चाहिए
- पूजा में चन्दन की सुगंध वाली धूप का प्रयोग करें.


मीन राशिवालों के लिए :
- सबसे बड़ी समस्या जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही है.
- इसके लिए भगवान गणेश की उपासना करें.
- प्रसाद में लड्डू चढ़ाएं लाभदायक होगा.

कपूर के इन उपायों से नहीं होगी पैसे की कमी

अगर आपकी किस्मत आपका साथ नहीं दे रही तो निराश होने की जरूरत नहीं है. कपूर आपके जीवन की समस्याओं को दूर कर सकता है. धन समस्या, वास्तुदोष, बीमारियों सभी से कपूर आपको बचा सकता है. जानें कैसे:
- वास्तुदोष को दूर करने के लिए घर में कपूर की दो गोली रखें. जब यह गल जाए तो फिर दो गोलियां रख दें. समय-समय पर आप कपूर रखते रहें. इससे वास्तुदोष खत्म हो जाएगा.

- धन की कमी से गुजर रहे हैं तो कुछ दिनों तक रात के समय चांदी की कटोरी में कपूर और लौंग को जलाएं.
- घर की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही तो कपूर को घी में भिगाएं और सुबह और शाम के समय इसे जलाएं. इससे निकलने वाली उर्जा से घर के अंदर सकारात्मक उर्जा आती है.

- बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं तो शनिवार को कपूर के तेल की बूंदों को पानी में डालें और फिर इस पानी से रोज स्नान करें.
- यदि विवाह में किसी भी तरह की समस्या आ रही है तो 6 कपूर के टुकड़े और 36 लौंग के टुकडे लें. अब इसमें चावल और हल्दी को मिला लें. इसके बाद देवी दुर्गा को इससे आहुति दें.

Tuesday, August 25, 2015

व्यक्ति और उसका जीवन ही शक्ति का स्रोत है

* वीरता से आगे बढो़। एक दिन या एक साल में सिद्धि की आशा न रखो। उच्चतम आदर्श पर दृढ़ एवं स्थिर रहो। स्वार्थपरता और ईर्ष्या से बचो। आज्ञा पालन करो। सत्य, मनुष्य जाति और अपने देश के पक्ष पर सदा के लिए अटल रहो और तुम संसार को हिला दोगे। याद रखो- व्यक्ति और उसका जीवन ही शक्ति का स्रोत है, इसके सिवाय अन्य कुछ भी नहीं।

* सभी मरेंगे ही, यही संसार का नियम है। साधु हो या असाधु, धनी हो या दरिद्र सभी मरेंगे। चिरकाल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।

* मन और मुंह को एक करके भावों को जीवन में कार्यान्वित करना होगा। इसी को श्रीरामकृष्ण कहा करते थे- भाव के घर में किसी प्रकार की चोरी न होने पाए। सब विषयों में व्यावहारिक बनना होगा। लोगों या समाज की बातों पर ध्यान न देकर वे एकाग्र मन से अपना कार्य करते रहेंगे। क्या तुमने नहीं सुने हैं कबीरदास के दोहे- 'हाथी चले बाजार में, कुत्ता भौंके हजार साधुन को दुर्भाव नहिं, जो निंदे संसार' ऐसे ही हमें भी निरंतर चलना है। दुनिया के लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना होगा। उनकी भली-बुरी बातों को सुनने से जीवन भर कोई किसी प्रकार का महत् कार्य नहीं कर सकता।

* प्रत्येक कार्य में अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग करो। पहले स्वयं संपूर्ण मुक्तावस्था प्राप्त कर लो, उसके बाद इच्छा करने पर फिर अपने को सीमाबद्ध कर सकते हो।

* मैं चाहता हूं कि मेरे सब बच्चे, मैं जितना उन्नत बन सकता था, उससे सौगुना उन्नत बनें। तुम लोगों में से प्रत्येक को महान शक्तिशाली बनना होगा। मैं कहता हूं- अवश्य बनना होगा। आज्ञा-पालन, ध्येय के प्रति अनुराग तथा ध्येय को कार्यरूप में परिणत करने के लिए सदा प्रस्तुत रहना। इन तीनों के रहने पर कोई भी तुम्हे अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकता।

* जो पवित्र तथा साहसी है, वही जगत् में सब कुछ कर सकता है। माया-मोह से प्रभु सदा तुम्हारी रक्षा करें। मैं तुम्हारे साथ काम करने के लिए सदैव प्रस्तुत हूं एवं हम लोग यदि स्वयं अपने मित्र रहें तो प्रभु भी हमारे लिए सैकड़ों मित्र भेजेंगे।

* आओ हम नाम, यश और दूसरों पर शासन करने की इच्छा से रहित होकर काम करें। काम, क्रोध एंव लोभ इस त्रिविध बंधन से हम मुक्त हो जाएं और फिर सत्य हमारे साथ रहेगा।

* न टालो, न ढूंढों! भगवान अपनी इच्छानुसार जो कुछ भेजें, उसके लिए प्रतिक्षा करते रहो, यही मेरा मूलमंत्र है।

* बिना पाखंडी और कायर बने सबको प्रसन्न रखो। पवित्रता और शक्ति के साथ अपने आदर्श पर दृढ रहो और फिर तुम्हारे सामने कैसी भी बाधाएं क्यों न हों, कुछ समय बाद संसार तुमको मानेगा ही।

* धीरज रखो और मृत्युपर्यंत विश्वासपात्र रहो। आपस में न लडो! रुपए-पैसे के व्यवहार में शुध्द भाव रखो। हम अभी महान कार्य करेंगे। जब तक तुममें ईमानदारी, भक्ति और विश्वास है, तब तक प्रत्येक कार्य में तुम्हे सफलता मिलेगी।

बिल्वपत्र

जानिए बिल्वपत्र के बारे में महत्वपूर्ण बातें

भगवान शिव के पूजन में बिल्वपत्र का बहुत महत्व है। कहा जाता है, कि बिल्वपत्र शि‍वजी को अतिप्रिय है। इसलिए भोलेनाथ को बि‍ल्वपत्र अर्पित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं बिल्वपत्र के बारे में  महत्वपूर्ण बातें ? यदि नहीं जानते, तो जरूर पढ़िए -


1  बिल्वपत्र 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता। इसे एक बार शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद धोकर पुन: चढ़ाया जा सकता है। कई जगह शिवालयों में बिल्वपत्र उपलब्ध नहीं हो पाने पर इसके चूर्ण को चढ़ाने का विधान भी है।

2.   बिल्वपत्र को औषधि‍ के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसमें निहित इगेलिन व इगेलेनिन नामक क्षार-तत्व औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। यह चातुर्मास में उत्पन्न होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से भी निजात दिलाता है ।

3  यह गैस, कफ और अपचन की समस्या को दूर करने में सक्षम है। इसके अलावा यह कृमि और दुर्गंध की समस्या में भी फायदेमंद है । प्रतिदिन 7 बिल्वपत्र खाकर पानी पीने से स्वप्नदोष की बीमारी से छुटकारा मिलता है। इसी प्रकार यह एक औषधि के रूप में भी काम आता है।

4  मधुमेह के रोगियों के लिए बिल्वपत्र रामबाण इलाज है। मधुमेह होने पर 5 बिल्वपत्र, 5 कालीमिर्च के साथ प्रतिदिन सुबह के समय खाने से अत्यधि‍क लाभ होता है। बिल्वपत्र के प्रतिदिन सेवन से गर्मी बढ़ने की समस्या भी समाप्त हो जाती है।
5  शिवलिंग पर प्रतिदिन बिल्वपत्र चढ़ाने से सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं भक्त को कभी भी पैसों की समस्या नहीं रहती है। बिल्वपत्र को तिजोरी में रखने से भी बरकत आती है।

6  कुछ विशेष तिथि‍यों पर बि‍ल्वपत्र को तोड़ना वर्जित होता है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति पर बिल्वपत्र को नहीं तोड़ना चाहिए।

7  सोमवार के दिन बिल्वपत्र को नहीं तोड़ना चाहिए, इसमें शि‍वजी का वास माना जाता है। इसके अलावा प्रतिदिन दोपहर के बाद भी बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।

Sunday, August 23, 2015

100 वर्ष जिंदा रहने के 5 उपाय

पहले के लोग निरोगी रहकर 100 वर्ष से भी ज्यादा ‍जिंदा रहकर जिंदगी का लुफ्त उठा लेते थे, लेकिन आजकल का व्यक्ति तो 60 के बाद धक्के खाने लगता है और मुश्किल से ही 80 पार कर पाता है। शोध से पता चला है कि अच्छी और सक्रिय जीवनशैली का फायदा उम्र के किसी भी पड़ाव में मिल सकता है।

हालांकि आज भी ऐसे कई लोग हैं जो अपनी उम्र का शतक लगाकर ढेर सारे अनुभव और शांति अपने साथ ले जाते हैं और ऐसे ही लोग को प्रकृति पूर्ण जीवन के लिए पुन: गर्भ उपलब्ध करा देती है। प्रकृति का चक्र पूरा करना बेहद जरूरी है। कोई फल बगैर पके वृक्ष से नीचे गिर गया है तो उसे नीचे भी वही प्रक्रिया पूर्ण करना होगी या फिर वह दुर्गति का शिकार होगा और नए जीवन के लिए भटकता रहेगा। तो जानते हैं सौ वर्ष जिंदा रहने के पांच राज....

अच्छा भोजन :
अच्छा भोजन चयन करना जरूरी है। ज्यादा मिर्च और तेल का भोजन नहीं करना चाहिए। बेसन और मैदे से बने आइटम तो त्याग ही देना चाहिए। किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए। सम्यक आहार लेला चाहिए अर्थात न ज्यादा और न कम।

भोजन करते वक्त जितनी भूख है उससे दो रोटी कम खाएं। भोजन में सलाद का ज्यादा प्रयोग करें। भोजन बैठकर (पालथी मारकर) ही करें। भोजन करते वक्त मन प्रसन्नचित्त रखें। ऐसा भोजन न करें, जिससे दांतों और आंतों को अतिरिक्त श्रम करना पड़े। भोजन करने के एक घंटे बाद ही पानी पीएं। यह भी ध्यान रखें क‍ि थाली में हाथ न धोएं। रात्रि का भोजन बहुत कम ही करें।

कहते हैं कि खान-पान में मात्रा जानने वाले, संभोग में नियम पालने वाले और अन्य बातों और इंद्रियों में संयम और सम्यकता समझने वाले को जब आंधी आती है तो सिर्फ छूकर चली जाती है, इससे विपरीत उक्त बातों का पालन न करने वाले को जड़ सहित उखाड़कर फेंक देती है।

जल-वायु :
धरती की जलवायु अच्छी होगी तो धरती पर सेहतमंद होगी उसी तरह हमारे शरीर के भीतर की जल वायु का शुद्ध और तरोताजा होना जरूरी है। प्रदूषित जल और वायु से जहां भोजन खराब होता है वहीं इससे गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

जल :
पानी (जल) पीएं छानकर। ध्यान रहे पानी हलका और मीठा पीएं। जब प्यास लगे तब पानी पीएं। पानी बैठकर ही पीएं। पानी गिलास से पीएं या फिर हाथों की अंजुली बनाकर ही पीएं। ऊपर से मुंह में पानी डालकर पीने के अपने नुकसान हैं। जिस पात्र में पानी भरा जाता है व पात्र ईशान कोण में रखा हो, उसके आसपास की जगह साफ हो।

वायु :
भोजन कुछ दिन न मिले तो जीवन चल जाएगा। पानी कुछ घंटे न मिले तो भी चल जाएगा, लेकिन हवा हमें हर पल चाहिए। जिस तरह दूषित भोजन और पानी स्वत: ही निकल जाते हैं या कभी-कभार निकालने का प्रयास करते हैं, उसी तरह शरीर के फेफड़ों और पेट में एकत्रित दूषित वायु को निकालने का प्रयास ‍करें। हलके प्रेशर से सांस बाहर फेंक दें, फिर पूरी गहराई से सांस भीतर खींचें, भ्रस्त्रिका और कपालभाति के इस हिस्से को जब भी समय मिले करते रहें। छींक आए तो पूरी ताकत से छींकें।

शहरी प्रदूषण के कारण शरीर में दूषित वायु के होने की स्थिति में भी उम्र क्षीण होती है और रोगों की उत्पत्ति होती है। पेट में पड़ा भोजन दूषित हो जाता है, जल भी दूषित हो जाता है तो फिर वायु क्यों नहीं। यदि आप लगातार दूषित वायु ही ग्रहण कर रहे हैं तो समझो कि समय से पहले ही रोग और मौत के निकट जा रहे हैं।

नींद :
नींद एक डॉक्टर है और दवा भी। आपकी नींद कैसी होगी, यह निर्भर करता है इस पर क‍ि आप दिनभर किस तरह से जीएं। जरूरी है कार्य, विचार, आहार और व्यवहार पर गंभीर मंथन करना। यदि यह संतुलित और सम्यक रहेगा तो भरपूर ‍नींद से स्वास्थ्‍य में लाभ मिलेगा। यह भी ध्यान रखें क‍ि ज्यादा या कम नींद से सेहत और मन पर विपरीत असर पड़ता है। अच्छे स्वप्नों के लिए अच्छी दिनचर्या को मैनेज करें। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

झपकी ध्यान :
यदि अत्यधिक कार्य के कारण आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है तो सिर्फ एक मिनट का झपकी ध्यान करें। ऑफिस या घर में जब भी लगे तो 60 सेकंड की झपकी मार ही लें। इसमें साँसों के आवागमन को तल्लीनता से महसूस करें। गहरी-गहरी सांस लें। यह न सोचें क‍ि कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा। हां आफिस में इसे सतर्कता से करें, वरना बॉस गलत समझ बैठेंगे। इस ध्यान से आप स्वयं को हर वक्त तरोताजा महसूस करेंगे।
मन और मस्तिष्क : मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख: या दिमागी बहस हमारी श्वासों की गति को अनियंत्रित करते हैं, जिससे खून की गति भी असंतुलित हो जाती है। इसका सीधा असर हृदय, फेफड़े और पेट पर होता है और यह गंभीर रोग का कारण भी बन सकता है। मानसिक द्वंद्व या दुख हामारी उम्र घटाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सुख-दुख से परे मन और मस्तिष्क को शांत और प्रसन्न चित्त रखने के लिए आप सुबह और शाम को 10 मिनट का ध्यान करें। ध्यान करना जरूरी है। ध्‍यान से मस्तिष्क और मन को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और इसके नियमित अभ्यास से किसी भी प्रकार की समस्या और दुख से व्यक्ति मुक्त हो जाता है।

मौन :
मौन से मन की आंतरिक्त शक्ति और रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुछ क्षण ऐसे होते हैं जबकि हम खुद-ब-खुद मौन हो जाते हैं। ऐसा कुछ विशेष परिस्थिति में होता है, लेकिन मौन रहने का प्रयास करना और यह सोचते हुए क‍ि मौन में कम से कम सोचने का प्रयास करूंगा, ज्यादा से ज्यादा देखने और श्‍वासों के आवागमन को महसूस करने का प्रयास करूंगा, एक बेहतर शुरुआत होगी। दो घंटे की व्यर्थ की बहस से 10 मिनट का मौन रिफ्रेश कर विजन पावर बढ़ाएंगा।

नियमित व्यायाम :
वैज्ञानिकों का कहना है कि 70 साल का कोई व्यक्ति यदि नियमित व्यायाम करता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह 100 वर्ष की उम्र तक जिए।

आर्काइव्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध के परिणाम कहते हैं कि लंबी उम्र के लिए हमारे जीन सिर्फ 30 प्रतिशत तक जिम्मेदार होते हैं बाकी का काम तो जीवन शैली करती है।

इसलिए आप योगासन या हल्की-फुल्की कसरत करें और इस बता को अच्छी तरह से तय कर लें कि किसी भी कीमत में पेट और कमर की चर्बी न बढ़ने पाएं।

Sunday, October 13, 2013

कुल्लू का दशहरा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

कुल्लू के दशहरे से जुड़ी कहानियां

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा सबसे अलग और अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। यहां इस त्योहार को दशमी कहते हैं। आश्विन महीने की दसवीं तारीख को इसकी शुरुआत होती है।


कुल्लू का दशहरा पर्व, परंपरा, रीतिरिवाज और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है। जब पूरे भारत में विजयादशमी की समाप्ति होती है उस दिन से कुल्लू की घाटी में इस उत्सव का रंग और भी अधिक बढ़ने लगता है।


कुल्लू में विजयदशमी के पर्व मनाने की परंपरा राजा जगत सिंह के समय से मानी जाती है।


यहां के दशहरे को लेकर एक कथा प्रचलित है- जिसके अनुसार एक साधु कि सलाह पर राजा जगत सिंह ने कुल्लू में भगवान रघुनाथ जी की प्रतिमा की स्थापना की। उन्होंने अयोध्या से एक मूर्ति लाकर कुल्लू में रघुनाथ जी की स्थापना करवाई थी। कहते हैं कि राजा जगत सिंह किसी रोग से पीड़ित थे, अतः साधु ने उसे इस रोग से मुक्ति पाने के लिए रघुनाथ जी की स्थापना की सलाह दी।


उस अयोध्या से लाई गई मूर्ति के कारण राजा धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगा और उसने अपना संपूर्ण जीवन एवं राज्य भगवान रघुनाथ को समर्पित कर दिया।


एक अन्य किंवदंती के अनुसार जब राजा जगतसिंह, को पता चलता है कि मणिकर्ण के एक गांव में एक ब्राह्मण के पास बहुत कीमती रत्न है, तो राजा के मन में उस रत्न को पाने की इच्छा उत्पन्न होती है और व अपने सैनिकों को उस ब्राह्मण से वह रत्न लाने का आदेश देता है।


सैनिक उस ब्राह्मण को अनेक प्रकार से सताते हैं। अतः यातनाओं से मुक्ति पाने के लिए वह ब्राह्मण परिवार समेत आत्महत्या कर लेता है। परंतु मरने से पहले वह राजा को श्राप देकर जाता है और इस श्राप के फलस्वरूप कुछ दिन बाद राजा का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है।

तब एक संत राजा को श्रापमुक्त होने के लिए रघुनाथजी की मूर्ति लगवाने को कहता है और रघुनाथ जी कि इस मूर्ति के कारण राजा धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। राजा ने स्वयं को भगवान रघुनाथ को समर्पित कर दिया तभी से यहां दशहरा पूरी धूमधाम से मनाया जाने लगा।