Wednesday, October 16, 2013

मेथी

मेथी को बहुत गुणकारी सब्जी माना गया है। लेकिन सिर्फ मेथी ही नहीं उसके बीज भी बहुत उपयोगी होते हैं। भारतभर में मेथी के बीज को आमतौर पर सेवन किया जाता है। इसके बीज एनीमिया यानी खून की कमी के रोगियों को यह बहुत फायदेमंद हैं। मेथीदानों में भी अनमोल औषधीय गुण होते हैं। ये कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के रोगियों के लिए अमृत के समान है।
- साइटिका और कमर दर्द में एक ग्राम मेथी दाना पाउडर और सौंठ पाउडर को थोड़े गर्म पानी के साथ दिन में दो-तीन बार लेना फायदेमंद है।

- मेथी दानों का लेप बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं, डेंड्रफ खत्म होती है और बाल झडऩे की समस्या से छुटकारा मिलता है। मेथी दानों को रात भर नारियल के गर्म तेल में भिगो कर रखें। सुबह इस तेल से सिर पर मसाज करें।

- डायबिटीज से बचने के लिए रोज सुबह एक छोटा चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ लें। एक टी स्पून मेथी दाने एक कप पानी में रात भर भिगो कर सुबह उसका पानी पीने से काफी आराम मिलता है।

- रोज सुबह-शाम एक से तीन ग्राम मेथी दाने पानी में भिगोकर चबाकर खाने से शरीर के जोड़ में दर्द नहीं होता, जोड़ मजबूत होते हैं। इससे गठिया और मांसपेशियों के दर्द में भी आराम आता है।

- अपच या बदहजमी होने पर आधा चम्मच मेथी दाना पानी के साथ निगलना चाहिए। थोड़ा मेथीदाना सुबह-शाम पानी के साथ निगलने से कब्ज दूर होता है।

- हाई ब्लड प्रेशर होने पर 5-5 ग्राम मेथी और सोया के दाने पीसकर सुबह-शाम पानी के साथ खाना फायदेमंद है। अदरख वाली मेथी की सब्जी खाने से लो ब्लडप्रेशर में फायदा होता है।
आयुर्वेद के अनुसार डाइबिटीज व मधुमेह में मेथी का सेवन बहुत लाभदायक माना गया है। मेथी को भारतभर में आमतौर पर सेवन किया जाता है। यदि मेथी की सब्जी लोहे की कढ़ाही में बनायी गई तो इसमें लौह तत्व ज्यादा बढ़ जाती है। एनीमिया यानी खून की कमी के रोगियों को यह बहुत फायदेमंद है।

किसी भी व्यक्ति की कैल्सियम की दिनभर की जरूरत 400 मि. ग्राम कैल्सियम मिल जाता है। विटामिन ए और सी भी मेथी में खूब रहता है। ये दोनों विटामिन मेथी दानों की तुलना में मेथी की सब्जी में ज्यादा होते है। साधारण मेथी चम्पा व कसूरी मेथी। मेथी व मेथी दाना डाइबिटीज रोगियों के लिए बहुत अधिक लाभदायक है।

यदि दिनभर में 25 से 100 ग्राम तक मेथी दाने किसी भी रूप में सेवन कर लिया जाए तो रक्त शुगर की मात्रा के साथ बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। रोगी राहत महसूस करता रहता है। पीसे हुए मेथी दाने 50 से 60 ग्राम मात्रा को एक ग्लास पानी में भिगो दें। 12 घंटे बाद छानकर पीएं। इस तरह से सुबह-शाम रोज दो बार पीते रहने से मधुमेह में आराम मिलता है। इसके अलावा मेथी के पत्तों की सब्जी भी खाएं।

मेथी बहुत ही कारगर औषधि है। इसके साथ ही यह पाचन शक्ति और भूख बढ़ाने में मदद करती है।
अन्य गुणों में बारे में जानिए।

बदहजमी/अपच : घरेलू उपचार में मेथी दाना बहुत उपयोगी होता है। आधा चम्मच मेथी दाना को पानी के साथ निगलने से अपच की समस्या दूर होती है।

साइटिका व कमर का दर्द : आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार मेथी के बीज आर्थराइटिस और सााइटिका के दर्द से निजात दिलाने में मदद करते हैं। इसके लिए 1 ग्राम मेथी दाना पाउडर और सोंठ पाउडर को थोड़े से गर्म पानी के साथ दिन में दो-तीन बार लेने से लाभ होता है।

डायबिटीज : इस रोग से दूर रहने के लिए प्रतिदिन 1 टी स्पून मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें। इसके अलावा एक टी स्पून मेथी दाना को एक कप पानी में भिगो कर रात भर के लिए छोड़ दें। सुबह इसका पानी पिएं। इससे सीरम लिपिड लेवल कम होता और वजन भी संतुलित रहता है।

उच्च रक्तचाप : 5-5 ग्राम मेथी और सोया के दाने पीसकर सुबह-शाम पीने से ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है।

न्यूट्रीशनल वैल्यू चार्ट
प्रति 100 ग्राम मेथी दाना में
आर्द्रता - 13.70ग्राम
प्रोटीन - 26.20ग्राम
वसा - 5.80ग्राम
मिनरल्स - 3.0ग्राम
फाइबर - 7.20ग्राम
कार्बोहाइड्रेट - 44.1ग्राम
एनर्जी - 333.0 किलोकैलरी
कैल्शियम - 160.0मिग्रा.
फास्फोरस - 370.0मिग्रा.
आयरन - 6.50मिग्रा.

मेथी घर-घर में सदियों से अपना स्थान बनाए हुए है। खास तौर पर इसका प्रयोग मसालों में किया जाता है। इसके बीजों में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन होने से ये कॉड लिवर ऑयल जैसे पोषक और बल प्रदान करने वाले होते हैं। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं।

मेथी का प्रयोग स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मेथी में कैंसर रोधक तत्व भी पाए जाते हैं।

इसका उपयोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पेट संबंधी समस्या में फायदेमंद होता है।

तुलसी


तुलसी के पत्तों का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन पत्तों को चबाए नहीं बल्कि ऐसे ही निगल लेना चाहिए। इस प्रकार तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ प्राप्त होता है। तुलसी के पत्तों में पारा धातु भी विद्यमान होती है जो कि पत्तों को चबाने से दांतों पर लगती है। यह हमारे दांतों के लिए फायदेमंद नहीं है। इससे दांत और मुंह से संबंधित रोग का खतरा बना रहता है। अत: तुलसी के पत्तों को बिना चबाए निगलना चाहिए।

Sunday, October 13, 2013

कुल्लू का दशहरा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

कुल्लू के दशहरे से जुड़ी कहानियां

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा सबसे अलग और अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। यहां इस त्योहार को दशमी कहते हैं। आश्विन महीने की दसवीं तारीख को इसकी शुरुआत होती है।


कुल्लू का दशहरा पर्व, परंपरा, रीतिरिवाज और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है। जब पूरे भारत में विजयादशमी की समाप्ति होती है उस दिन से कुल्लू की घाटी में इस उत्सव का रंग और भी अधिक बढ़ने लगता है।


कुल्लू में विजयदशमी के पर्व मनाने की परंपरा राजा जगत सिंह के समय से मानी जाती है।


यहां के दशहरे को लेकर एक कथा प्रचलित है- जिसके अनुसार एक साधु कि सलाह पर राजा जगत सिंह ने कुल्लू में भगवान रघुनाथ जी की प्रतिमा की स्थापना की। उन्होंने अयोध्या से एक मूर्ति लाकर कुल्लू में रघुनाथ जी की स्थापना करवाई थी। कहते हैं कि राजा जगत सिंह किसी रोग से पीड़ित थे, अतः साधु ने उसे इस रोग से मुक्ति पाने के लिए रघुनाथ जी की स्थापना की सलाह दी।


उस अयोध्या से लाई गई मूर्ति के कारण राजा धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगा और उसने अपना संपूर्ण जीवन एवं राज्य भगवान रघुनाथ को समर्पित कर दिया।


एक अन्य किंवदंती के अनुसार जब राजा जगतसिंह, को पता चलता है कि मणिकर्ण के एक गांव में एक ब्राह्मण के पास बहुत कीमती रत्न है, तो राजा के मन में उस रत्न को पाने की इच्छा उत्पन्न होती है और व अपने सैनिकों को उस ब्राह्मण से वह रत्न लाने का आदेश देता है।


सैनिक उस ब्राह्मण को अनेक प्रकार से सताते हैं। अतः यातनाओं से मुक्ति पाने के लिए वह ब्राह्मण परिवार समेत आत्महत्या कर लेता है। परंतु मरने से पहले वह राजा को श्राप देकर जाता है और इस श्राप के फलस्वरूप कुछ दिन बाद राजा का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है।

तब एक संत राजा को श्रापमुक्त होने के लिए रघुनाथजी की मूर्ति लगवाने को कहता है और रघुनाथ जी कि इस मूर्ति के कारण राजा धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। राजा ने स्वयं को भगवान रघुनाथ को समर्पित कर दिया तभी से यहां दशहरा पूरी धूमधाम से मनाया जाने लगा।

Wednesday, October 2, 2013

रोज सुबह सिर्फ पानी से किया ये उपाय

ऐसा माना जाता है कि सुबह-सुबह महालक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण पर निकलती हैं। इस दौरान जिन घरों में साफ-सफाई और पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है वहां लक्ष्मी निवास करती हैं।

तांबे के लौटे से मुख्य द्वार पर पानी छिड़कने से घर के आसपास का वातावरण पवित्र हो जाता है। नकारात्मकता नष्ट हो जाती है। पवित्र वातावरण घरों में ही सुख-समृद्धि और धन का वास होता है। ऐसे घर में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।

हमारे घर में जो भी महिला सुबह जल्दी उठती हो उसे यह उपाय करना चाहिए। उपाय के लिए स्त्री को सुबह जल्दी उठना है और घर के मुख्य द्वार पर प्रतिदिन तांबे के लौटे से जल छिड़कना है। यह छोटा सा उपाय है लेकिन बहुत कारगर है। जिन घरों में यह उपाय किया जाता है उन्हें महादेवी की कृपा प्राप्त हो जाती है।

शास्त्रों के अनुसार पुण्य बढ़ाने और किस्मत चमकाने का एक उपाय है देवी-देवताओं को जल अर्पित करना। यदि आपके घर के आसपास कोई मंदिर नहीं है या आप मंदिर जा नहीं पाते हैं तो ऐसे में घर के मंदिर में इष्टदेवी-देवताओं की मूर्तियों पर जल अर्पित किया जा सकता है।

देवी-देवताओं पर जल चढ़ाने के साथ ही यदि आप यहां बताया जा रहा 1 लोटे पानी का भी उपाय करेंगे तो आपकी कुंडली के सभी दोषों का निवारण हो जाएगा। भाग्योदय में आ रही बाधाएं दूर हो जाएंगी।

ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों के अलग-अलग वृक्ष बताए गए हैं। इन वृक्षों की विधि-विधान से पूजा करने पर ग्रहों के दोष दूर होते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह अशुभ फल देने वाला हो या किसी ग्रह की कुदृष्टि हो या बुरा प्रभाव देने वाले ग्रहों की युति हो या कोई अशुभ योग बन रहा हो तो ऐसी स्थितियों में पेड़ों से संबंधित कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाने पर कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगते हैं।

राशि अनुसार इन पेड़ों को करें एक लोटा जल अर्पित...
मेष एवं वृश्चिक- खैर
वृषभ एवं तुला- गूलर
मिथुन एवं कन्या- अपामार्ग
कर्क- पलाश
सिंह- आक
धनु एवं मीन- पीपल
मकर एवं कुंभ- शमी

इन्हीं पेड़ों की लकडिय़ों से इन राशियों के स्वामी ग्रहों की शांति हेतु हवन किया जाता है।

सभी वृक्षों का अपना अलग महत्व है लेकिन कुछ वृक्ष ऐसे है जिनका शास्त्रों में काफी महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि पीपल में जल अर्पित करने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अन्य वृक्ष जैसे नीम, बरगद, बेलपत्र, अशोक, चंदन, आम आदि की भी पूजा की जाती है या इनके फल, पत्ते, तने को पूजा में शामिल किया जाता है।

पीपल में जल चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती या ढय्या में बहुत जल्द लाभ प्राप्त होता है, कालसर्प दोष का प्रभाव भी कम होता है। जिन लोगों का भाग्य साथ नहीं देता उन्हें पीपल में प्रतिदिन जल चढ़ाकर, सात परिक्रमा करनी चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में व्यक्ति को भाग्य का साथ अवश्य मिलने लगेगा।