Sunday, March 11, 2012

आज क्या करें कि दिन शुभ हो

यदि आप सप्ताह में कुछ खास कार्य करने जा रहे हैं तो निम्न उपायों के साथ अपने दिन की शुरूआत करें। इन उपायों के प्रभावों से आपके कार्य की सफलता के योग और मजबूत होंगे।
  सोमवार- आज के दिन सफलता प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। अगर यह संभव न हो तो कार्य के लिए घर से निकलने के पहले दूध या पानी पी लें। साथ ही ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स: सोमाय नम: मंत्र बोल कर प्रस्थान करें। सफेद रूमाल साथ रखें। सफेफूशिचढ़ाएं। 
मंगलवार- आज हनुमान मंदिर जाएं। साथ ही हनुमानजी को बना हुआ पान और लाल फूल चढ़ाएं। घर से निकलने से पहले शहद का सेवन करें और ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: मंत्र बोल कर प्रस्थान करें। लाल वस्त्र पहनें या लाल कपड़ा साथ रखें। लाफूहनुमानजी कमंदिमेरखें। 
बुधवार- गणेशजी को दूर्वा अर्पित करें। गणपतिजी को गुड़-धनिया का भोग लगाएं। घर से सौंफ खा कर निकलें। ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: मंत्र का जप करें। हरे रंग के वस्त्र पहनें या हरा रूमाल साथ रखें। तुलसनीचगिरपत्तोउठाकधोकउनकसेवकरें। 
गुरुवार- भगवान विष्णु के मंदिर जाएं। श्रीहरि को पीले फूल अर्पित करें। साथ ही ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरुवे नम:मंत्र का जप करें। पीले रंग की कोई मिठाई खाकर घर से निकलें। पीले वस्त्र पहनें या पीला रूमाल साथ रखें। पीलफूकिसमंदिर-दरगामेचढ़ाएं। 
शुक्रवार- सफलता के लिए लक्ष्मीजी को लाल फूल अर्पित करें। ऊँ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम: मंत्र का जप करें। घर से निकलने से पहले दही का सेवन करें। सफेद रंग की ड्रेस पहनें या सफेद रूमाल साथ रखें। सफेफूदेवमंदिमेचढ़ाएं। 
शनिवार- हनुमान मंदिर जाएं। हनुमानजी को बना हुआ पान और लाल फूल चढ़ाएं। ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र जप कर घर से निकलें। तिल का सेवन करें। नीले वस्त्र पहनें या नीला रूमाल साथ रखकर प्रस्थान करें। नीलजामुनी फशनि मंदिमेचढ़ाएं। 
रविवार- आज सूर्य देव को जल चढ़ाएं फिर लाल फूल चढ़ाएं। आज ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौ स: सूर्याय नम: मंत्र जप करें। गुड़ का सेवन करें। लाल रंग की ड्रेस पहनें या लाल रूमाल रखें। लागुलाबफूसूर्यदेअर्पिकरें। 

आसान से वास्तु उपाय


यदि आपके घर का बजट गड़बड़ा गया हो, आप से ज्यादा खर्च होता है, परिवार में अशांति रहती है, नोट कमाने के सारे प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे हों, तो भगवान को खुश करने के लिए पूजा कक्ष में लाल रंग का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।

जहां आप बटुआ रखते हों, उस स्थान को भी लाल व पीले कलर से रंग दें। कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होगा। यदि आपको लगता है कि आपसे कोई ईर्ष्या करता है, आपके कई दुश्मन हो गए हैं। हमेशा असुरक्षा व भय के माहौल में जी रहे हों, तो मकान की दक्षिण दिशा में से जल के स्थान को हटा दें। इसके साथ ही एक लाल रंग की मोमबत्ती आग्नेय कोण में तथा एक लाल व पीली मोमबत्ती दक्षिण दिशा में नित्यप्रति जलाना शुरू कर दें।

घर में बेटी जवान है, उसकी शादी नहीं हो पा रही है, तो एक उपाय करें- कन्या के पलंग पर पीले रंग की चादर बिछाएं, उस पर कन्या को सोने के लिए कहें। इसके साथ ही बेडरूम की दीवारों पर हल्का रंग करें। ध्यान रहे कि कन्या का शयन कक्ष वायव्य कोण में स्थित होना चाहिए।

कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन अपने भाग्य को कोसने के बजाय एक उपाय करें- नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल हनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें।

लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना लगे सौम्य लगे। रात में सोते समय शयन कक्ष में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। अतः हमेशा अपने साथ रखें व इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी।

जीवन में पीले रंग को सफलता का सूचक कहा जाता है। पीला रंग भाग्य में वृद्धि लाता है। कन्या की शादी में पीले रंग का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कन्या ससुराल में सुखी रहेगी।

विवाह निर्विघ्न होने की शुभ सूचना वस्तुतः हल्दी से सम्पन्न होती है, क्योंकि हल्दी को गणेशजी की उपस्थिति माना जाता है। और जिस कार्य में गणेश जी स्वयं उपस्थित हों, उस कार्य को पूरा करने में विघ्न कैसे आ सकता है।

हल्दी की गांठों में कभी-कभी गणेश जी की मूर्ति का चित्र मिलता है। लक्ष्मी अन्नपूर्णा भी हरिद्रा कहलाती हैं। श्री सूक्त में वर्णन किया गया है कि लक्ष्मी जी पीत वस्त्र धारण किए है। अतः आप समझ सकते हैं कि हल्दी का कितना महत्व है। इतना ही नहीं, बृहस्पति का रंग भी पीत वर्ण का है, तभी तो पीत रंग का पुखराज पहनकर बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।

मुहूर्त का महत्व


भारतीय संस्कृति में पंचांग, मुहूर्त का बहुत महत्व है। जो हमें किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले बहुत सारी सावधानियां बरतने की सलाह भी देता है।

मुहूर्त के अंतर्गत कुछ विशेष प्रकार की सावधानियों का जिक्र किया गया है। जो निम्नानुसार है।

- रिक्ता तिथियों यानी चतुर्थी, नवमी एवं चतुदर्शी के दिन रोजगार संबंधी कोई भी नया काम नहीं शुरू करना चाहिए।

- शुभ एवं मांगलिक कार्य अमावस्या तिथि में शुरू नहीं करना चाहिए।

- रविवार, मंगलवार एवं शनिवार के दिन समझौता एवं संधि नहीं करनी चाहिए। दिन, तिथि व नक्षत्र का योग जिस दिन 13 आए उस दिन उत्सव का आयोजन नहीं करना चाहिए।

- नन्दा तिथियों एवं प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी तिथि के दिन नवीन योजना पर कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

- देवशयन काल में बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिलाना चाहिए।

- बुधवार के दिन उधार देना व मंगलवार को उधर लेना मुहूर्त की दृष्टि से शुभ नहीं माना गया है।

- नए वाहन खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि आपकी राशि से चंद्रमा घात राशि पर मौजूद नहीं हो।

- कोई ग्रह जब उदय या अस्त हो तो उसके तीन दिन पहले और बाद में नया काम नहीं करना चाहिए।

- जन्म राशि और जन्म नक्षत्र का स्वामी जब अस्त, वक्री अथवा शत्रु ग्रहों के बीच हों तब आय एवं जीवन से जु़ड़े विषय को विस्तार नहीं देना चाहिए।

- मुहूर्त में क्षय तिथि का भी त्याग करना चाहिए।

- असफलता से बचने के लिए जन्म राशि से चौथी, आठवीं और बारहवीं राशि पर जब चंद्र हो उस समय नया काम शुरू नहीं करना चाहिए।

Saturday, December 31, 2011

राशि 2012: साढ़ेसाती का प्रभाव


वर्ष 2012 में शनि तुला यानी तराजू की राशि से अपनी यात्रा आरंभ करेगा। 9 फरवरी को यह वक्री यानी उल्टी चाल से चलने लगेगा। लगातार मार्च अप्रैल और मई तक वक्री चलते हुए 17 मई को यह कन्या राशि में उल्टा प्रवेश करेगा 25 जून को यह कन्या राशि में मार्गी होगा उसके उपरान्त 5 अगस्त को यह पुनः तुला राशि में प्रवेश कर जाएगा।

वर्ष 2012 के आरंभ में शनि चित्रा नक्षत्र के उत्तरार्ध और तुला राशि से अपना भ्रमण आरंभ करेगा। इसके अनुसार कन्या राशि को उतरती साढ़ेसाती रहेगी। तुला राशि को भोग में मध्य साढ़ेसाती रहेगी जबकि वृश्चिक राशि को सिर पर चढ़ती साढ़ेसाती रहेगी। साढ़ेसाती के दौरान कन्या, तुला औस वृश्चिक राशिवालों को शारीरिक मानसिक तथा आर्थिक परेशानियों के अलावा शत्रु आदि का भय भी रहेगा। गुप्त चिन्ताएं रहेंगी। हर महत्वपूर्ण कार्य में विलम्ब और बाधा आएगी। दिमाग पर हमेशा निराशा का बोझ रहेगा। मान सम्मान की हानि तथा समाज और सरकार में बदनामी या लज्जित हो सकते हैं। आरोप लांछन भी लग सकते हैं। भोग विलास और अवांछित कार्यो से पीछा नहीं छूट पाएगा। सट्टेबाजी या दुर्बुद्धि के कारण संचित धन का नुकसान होगा। इसके अलावा कर्म के अनुसार शनि की साढ़साती में इसके अच्छे और बुरे फल भोगने को तैयार रहना पड़ेगा। यह भी कहते है कि शनि अपनी गोवर साढ़ेसाती के दौरान हर पिछले अच्छे और बुरे कर्मो का हिसाब लेता है। सत्कर्मी को बख्श देता है और कुकर्मी को सजा देता है ! हर तीस साल में प्रत्येक जातक को शनि महाराज के आगे हाजिर होना पड्रता है।

ऐसा नही कि शनि कि साढ़ेसाती आलसी और निकम्मे लोगो को ही पेलती है। शुद्ध और पवित्र आचरण से जीवनयापन करने वाले चरित्रवान लोगों पर भी शनि का कुछ दुष्प्रभाव जरूर होता है लेकिन समयानुसार उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति भी मिल जाएगी। जिन महानुभावों का जन्मजात शनि उनकी जन्मकुंडली में योगकारक और अच्छा है उनके लिए यह साढ़ेसाती बहुत ही लाभप्रद सफलतादायक और राजयोग कारक भी होगी। फिर भी शनि की गोचर स्थिति कम या ज्यादा सभी को ही थोडा-थोडा सुख और दुख का स्वाद देने वाली जरुर होती है।

सभी राशियों के लिए शनि का गोचर फल इस प्रकार रहेगा :

मेष( Aries ) : इस वर्ष आपको शनि का तांबे का पाया रहेगा। सप्तम भाव का शनि आमदनी में तो वृद्धि करेगा लेकिन खर्च भी बढ़ाएगा। मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय लोगों को धन का अभाव राजकीय और सामाजिक जीवन में परेशानी महत्वपूर्ण कार्यो में अवरोध ओर प्रियजनों से विच्छेद या बिछोह का दुख रहेगा। व्यापारि और कारोबारी लोगों को धनहानि और बढ़ते खर्च के चलते पूंजी में क्षय तथा कानूनी विवाद और रोग व्याधि होंगे। अनावश्यक खर्च बढ़ने की आशंका रहेगी।

वृष (Taurus): इस साल शनिदेव आपकी राशि पर चांदी के पाये से विराजमान रहेंगे। छटा शनि उद्योग व्यापार और आजीविका में लाभदायी होगा। लेकिन पारिवारिक सम्बन्धों और मित्रों में तनाव पैदा करेगा। नौकरी पेशा लोगों के लिए समय कुछ कष्टसाध्य रहेगा। तकनीकी और अर्द्धतकनीकी कार्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए प्रगति के अवसर रहेंगे। जिन जातकों के मंगलकार्य रुके हुए हैं उन्हें इस वर्ष मई-जून के उपरान्त मनोवांछित शुभकार्य होने से हर्ष प्राप्त होगा। प्रौढ़ और वृद्ध जातकों को शरीर कष्ट तथा हड्डी और मांसपेशियों के दर्द की शिकायत रहेगी।

मिथुन (Gemini): इस वर्ष शनि का गोचर सोने के पाये से रहेगा। पंचम शनि चारों तरफ विरोध और अपकीर्ति फैलाता है। किसी से ज्यादा मिलना-जुलना, बातचीत और विपरीत योनि से अधिक प्रगाढ़ता नुकसान और विवाद का कारण बन सकती है। यद्यपि लाभमार्ग ठीकठाक रहेगा फिर भी खर्च भी बढ़चढ़कर होंगे। सन्तान पक्ष से चिन्ता बढ़ेगी। युवा और प्रौढ़ जातकों के लिए समय काफी भागदौड़ वाला भी होगा। किसी नए कारोबार में प्रवेश करने की इच्छा होगी परन्तु पूंजी के संयोजन में धोखाधड़ी की भी आशंका रहेगी।

कर्क (Cancer): इस वर्ष शनि लोहे के पाये से आपकी राशि को पीड़ित करेगा। चैथा शनि आजीविका और कारोबार मे उतार चढ़ाव पैदा करता है। महत्वाकांक्षा बढ़ जाने से अलाभकारी उपक्रमों में फंस जाने की आशंका रहेगी। जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं लेकिन काफी सोच समझकर और कानूनी मुद्दों को अच्छी तरह जांच परखकर। नौकरी और आजीविका के लिए स्थान परिवर्तन हो सकता है। घर के बुजुर्ग सदस्यों का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय बन सकता है। चैथा शनि वाहन आदि के लिए शुभ है। अतः धार्मिक यात्राओं के साथ साल का कुछ समय आपके लिए सांत्वनाप्रद होगा।

सिंह (Leo): इस वर्ष आपकी राशि को शनि सोने के पाये से अपना असर डालेगा। सबकुछ ठीकठाक रहते हुए भी अप्रत्याषित हानि और भय की आशंका रहेगी। गोचर में तीसरा शनि लाभकारक तो काफी होता है लेकिन भाग्यस्थान में कुदृष्टि होने से कभी कभी महतवपूर्ण कार्यो में बाधा भी आ सकती है। सन्तान पक्ष से अच्छी खबर मिल सकती है। घर में शादी विवाह आदि मंगल कार्य सम्पन्न होंगे। विदेश यात्रा भी हो सकती है और कारोबार में प्रगति के भी पूर्ण संभावना रहेगी। पिछले कई वर्षों से जो साढ़ेसाती की पीड़ा आपकी राशि ने भोगी है अब उसमें पूर्ण रूप से राहत मिलेगी। धन जमा होगा और निवेश करने में रुचि रहेगी। शेयर बाजार तथा अन्य प्रकार की सट्टेबाजी में सावधानी बरतें तो बेहतर रहेगा।

कन्या (Virgo) : इस वर्ष आपकी राशि को शनि तांबे के पाये से रहेगा। इस वर्ष उतरती साढ़ेसाती रहेगी और शनि धन तथा कुटुम्बभाव में विचरण करेगा। आर्थिक और शारीरिक कष्ट के साथ-साथ चोर, अग्नि, वाहन आदि से कष्ट हो सकते हैं। मित्रों और सगे सम्बन्धियों से विश्वासघात हो सकता है। अकारण शत्रु बढ़ सकते हैं। चल अचल सम्पत्ति के लेन देन में बाधा उत्पन्न होगी। मई-जून के उपरान्त कुछ छोटे मोटे लाभ होंगे। युवा वर्ग को परीक्षा प्रतियोगिता या नौकरी आदि में प्राथमिकता मिल सकती है। प्रौढ़ और वृद्धि जातकों को पारिवारिक सुख सम्मान तथा इच्छित कार्यो में सफलता मिल सकती है।

तुला ( Libra): इस वर्ष आपकी राशि को शनि चांदी के पाये से रहेगा। साढ़ेसाती की दूसरी ढैया रहेगी। राशि पर चल रहा शनि शरीर में रोग और कामकाज में थकान तथा नीरसता पैदा करेगा। सामाजिक जीवन में विरोधी और शत्रु पैदा होने से कभी-कभी अपमानजनक स्थितियां पैदा हो सकती हैं। घर के लोगों से व्यवस्था सम्बन्धी चूक होने से धनहानि के आसार रहेंगे। कारोबार में भी शनि की साढ़ेसाती कभी फायदेमन्द तो कभी नुकसानदेह साबित होगी। साल की शुरुआत में कुछ अच्छी खबरें भी मिलेंगी। दाम्पत्य जीवन तथा साझेदारी में सहयोग मिलने की आशा रहेगी।

वृश्चिक ( Scorpio): इस वर्ष शनि आपकी राशि में चढ़ती साढ़ेसाती लोहे के पाये से रहेगी। बारहवां शनि अभी साढ़ेसाती की शुरुआत कर रहा है। हर काम में उलट फेर की आशंका रहेगी। घर के सदस्य और सन्तान पक्ष द्वारा मनमाने काम करने से आश्चर्य होगा और आपके अस्तित्व को एक चुनौती मिल सकती है। संचित धन गैर मामूली कार्यो में खर्च होगा। वाद-विवाद और रोग बीमारी को टालने में भी धन की हानि हो सकती है। साढ़ेसाती की शुरुआत तभी अच्छी हो सकती है जब आप समय की धारा को देखते हुए अपना काम करें। स्वार्थ और लालच के चक्कर में और भी संकट पूर्ण स्थिति आ सकती है। बेहतर यही होगा कि जैसा चल रहा है उसे स्वीकार कर लें।

धनु ( Sagittarius): धनु राशि पर शनि तांबे के पाये से असर करेगा। फिलहाल शनि अगले ढाई साल के लिए एकादश यानी लाभ स्थान में रहेगा। कुछ नये काम शुरु करने की प्रेरणा मिलेगी लेकिन बृहस्पति के अनुकूल नहीं होने से नये नये संकट भी सामने आएंगे। यदि पूर्व में कोई नैतिक भूलचूक की है अथवा गलती हुई है तो उसका दुष्परिणाम इस दौरान भोगना पड़ सकता है। सन्तान पक्ष से चिन्ता बनी रहेगी। दाम्पत्य जीवन में भी उतार-चढ़ाव आयेंगे। किसी भारी खर्च से भी आप बच नहीं सकते हैं। स्वभाव और व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ सकता है। शनि अभी आपकी राशि को देख रहा है अतः सिर में दर्द, हड्डियों और घुटनों में दर्द तथा घर में चोर ओर उचक्कों का भय बना रहेगा। कुछ अकल्पनीय फायदे भी इस बीच हो सकते है।

मकर (Capricorn): मकर राशिपर शनि सोने के पाये से असर करेगा। दशमभाव में शनि विचरण कर रहा है। कामकाज और व्यापार में तरक्की हो सकती है। खर्च भी कुछ बढ़ जायेंगे। घर के बुजुर्गों का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय बनेगा। सामाजिक और राजकीय स्तर पर आपका मान सम्मान बढ़ सकता है। यदि नौकरी में हैं तो पदोन्नति एवं अच्छे स्थान पर नियुक्ति हो सकती है। युवा और विद्यार्थी वर्ग को परीक्षा आदि में अच्छी सफलता मिल सकती है। रोजगार और देश देशान्तर की यात्रा का अवसर भी मिलेगा। शुभ शनि आपकी राशि का स्वामी है अतः अच्छे समय का सदुपयोग करना जरूरी है।

कुंभ ( Aquarius): कुंभ राशिपर शनि चांदी के पाये से रहेगा। भाग्यस्थान का शनि बौद्धिक और आर्थिक विकास के लिए उत्तम है। नौकरी या व्यवसाय में तरक्की के अवसर मिलेंगे। नई प्रॉपर्टी की खरीद हो सकती है। जमा पूंजी का लाभदायक निवेश भी होगा। घर परिवार में रुके हुए मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। किसी अच्छे सहयोगी या मित्र के द्वारा कोई बड़ा फायदे का सौदा भी हाथ में आ सकता है। अनेक प्रकार के शुभफलों के साथ-साथ इस साल आपको कई प्रकार की चिन्ताओं और वाद विवादों से भी मुक्ति मिल सकती है। कोर्ट कचहरी आदि में विजय हो सकती है।

मीन (Pisces): मीन राशि पर शनि लोहे के पाये से रहेगा। अष्टम शनि कार्यक्षेत्र में अधिक तनाव तो देगा लेकिन देर सबेर आपकी उन्नति और प्रोन्नति भी होती रहेगी। पूंजी निवेश और जमीन-जायदाद की खरीद कर सकते हैं। देश या विदेश की लम्बी यात्रा हो सकती है। सरकार से या संस्थओं से लाभ हो सकता है। आपके अधिकार और कार्यक्षेत्र में मनोवांछित बदलाव आ सकता है। कुछ सावधानी भी जरूरी है जैसे कि यात्रा के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखें और जमा पूंजी को सही ढंग से रखें। अष्टम शनि छल और धोखे से भी धन हानि करवाता है अतः किसी प्रकार की लेन देन वाली समस्या को विचार पूर्वक ही हल करें। कुल मिलाकर साल अच्छा है।

शनि का प्रभाव कैसे होता है
शनि के चार पाये यानी पाद लोह , ताम्र , स्वर्ण , और रजत होते हैं। गोचर में जिन राषियों पर शनि सोना या स्वर्ण और लोहपाद से चल रहा है उनके लिए शनि का प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता। जिन पर शनि चांदी या तांबे के पाये से चल रहा है उनको फल कुछ अच्छे और कुछ मिश्रित रूप से मिलते हैं।

शनि अपना प्रभाव 3 चरणों में दिखाता है जो साढ़े सात शुरु के साढ़े सात सप्ताह से आरंभ होकर साढ़े सात वर्ष तक लगातार जारी रहता है।
पहले चरण में : जातक का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है तथा वह अपनी उद्देश्य से भटक कर चंचल वृति धारण कर लेता है उसके अन्दर स्थिरता का अभाव अपनी गहरी पैठ बना लेता है। पहले चरण की अवधि लगभग ढाई वर्ष तक होती है।
दूसरे चरण में : मानसिक के साथ साथ शारीरिक कष्ट भी उसको घेरने लगते हैं उसके सारे प्रयास असफल होते जाते हैं। तन,मन, धन से वह निरीह और दयनीय अवस्था में अपने को महसूस करता है। इस दौरान अपने और परायों की परख भी हो जाती है। अगर उसने अच्छे कर्म किए हों तो इस दौरान इसके कष्ट भी धीरे धीरे कम होने लगते हैं। यदि दूषित कर्म किए हैं और गलत विचारधारा से जीवनयापन किया है तो साढ़ेसाती का दूसरा चरण घोर कष्टप्रद होता है। इसकी अवधि भी ढाई साल होती है।
तीसरे चरण में : तीसरे चरण के प्रभाव से ग्रस्त जातक अपने संतुलन को पूर्ण रूप से खो चुका होता है और उसमें क्रोध की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। परिणाम स्वरूप हर कार्य का उल्टा ही परिणाम सामने आता है और उसके शत्रुओं की वृद्धि होती जाती है। मतिभ्रम और गलत निर्णय लेने से फायदे के काम भी हानिप्रद हो जाते हैं। स्वजनों और परिजनों से विरोध बढ़ता है। आम लोगों में छवि खराब होने लगती है अतः जिन राशियों पर साढ़े साती तथा ढैया का प्रभाव है उन्हें शनि की शन्ति के उपचार करने पर अशुभ फलों की कमी होने लगती है और धीरे-धीरे वे संकट से निकलने के रास्ते प्राप्त कर सकते हैं।

शनि शान्ति के उपाय और उपचार :-
1. प्रतिदिन घर मे गुग्गल धूप जलायें और सायंकाल के समय लोबान युक्त बत्ती सरसों तेल के दीये में डालकर तुलसी या पीपल की जड़ में दीपक जलाएं। 2. शनिवार को कच्चे सूत को सात बार पीपल के पेड़ में लपेटे।
3. बन्दरों को गुड़ चना, भैसे को उर्द के आटे की रोटी तथा दूध से आटा माड़ कर रोटी बनाकर मोरों को चुगाएं।
4. जटायुक्त कच्चे नारियल सिर के ऊपर से 11 बार उतार कर 11 नारियल बहते जल में प्रवाहित करें।
5. काले वस्त्र कम्बल सतनाजे से तुलादान एवं छाया पात्र दान करें।
6. माफिक आये तो 7 रत्ती का शुद्व नीलम रत्न धारण करे।
8. आर्थिक हानि अथवा रोग बिमारी से बचने के लिए शनियंत्र युक्त बाधामुक्ति ताबीज और घर में अभिमंत्रित शनियंत्र रखकर उसपर तिल और सरसो के तेल का नित्य अभिषेक करे।
9.. महामृत्युंजय का जप, हनुमान चालीसा का पाठ भी शनि बाधा को शान्त करता है। 

पं . केवल आनंद जोशी
(kajoshi46@gmail.com ) 

Tuesday, November 22, 2011

सही वास्तु दिलाएगा धन-समृद्धि...


यूं तो किसी को किस्मत से ज्यादा नहीं मिलता लेकिन कई बार अनेक बाधाओं के कारण किस्मत में लिखी धन-समृद्धि भी प्राप्त नहीं होती। वास्तु को मानने वाले अगर इसके मुताबिक काम करें तो उन्हें वो मिल सकता है जो अब तक नहीं मिला है।

पूर्व दिशा : यहां घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमें बढ़ोतरी होती रहती है।

पश्चिम दिशा : यहां धन-संपत्ति और आभूषण रखे जाएं तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है। परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है।

उत्तर दिशा : घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते हैं, वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए। इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी।

लक्ष्मी प्राप्ति उपाय
ND
दक्षिण दिशा : इस दिशा में धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परंतु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है।

ईशान कोण : यहां पैसा, धन और आभूषण रखे जाएं तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुद्धिमान है और यदि यह उत्तर ईशान में रखे हों तो घर की एक कन्या संतान और यदि पूर्व ईशान में रखे हों तो एक पुत्र संतान बहुत बुद्धिमान और प्रसिद्ध होता है।

आग्नेय कोण : यहां धन रखने से धन घटता है, क्योंकि घर के मुखिया की आमदनी घर के खर्चे से कम होने के कारण कर्ज की स्थिति बनी रहती है।

नैऋत्य कोण : यहां धन, महंगा सामान और आभूषण रखे जाएं तो वह टिकते जरूर है, किंतु एक बात अवश्य रहती है कि यह धन और सामान गलत ढंग से कमाया हुआ होता है।

वायव्य कोण : यहां धन रखा हो तो खर्च जितनी आमदनी जुटा पाना मुश्किल होता है। ऐसे व्यक्ति का बजट हमेशा गड़बड़ाया रहता है और कर्जदारों से सताया जाता है।

सीढ़ियों के नीचे तिजोरी रखना शुभ नहीं होता है। सीढ़ियों या टायलेट के सामने भी तिजोरी नहीं रखना चाहिए। तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या मकड़ी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।

घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मीजी की तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।

Saturday, November 12, 2011

हरी सब्जियों के लाभ!


गोभी, आलू, बीन्स आदि शरीर के विविध भागों, तत्वों, मात्राओं को प्रभावित करते हैं।
*अदरक, धनिया, पुदीना, हरी मिर्च सब्जियों के तत्वों एवं स्वाद को बढ़ाने में मदद करते हैं।
* लहसुन खून का थक्का जमने नहीं देता अतः हृदय रोग में लाभकारी है।
* करेला पेट के कृमि नष्ट करता है और रक्त शोधन कर, अग्नाशय को सक्रिय करता है।
* टमाटर शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाता है और त्वचा निखारता है।
*नींबू शरीर के पाचक रसों को बढ़ाता है।
*पालक हड्डियों को कैल्शियम से सुदृढ़ करता है।
*भिंडी वीर्य में गाढ़ापन लाती है और शुक्राणु बढ़ाती है।
* लौकी शीघ्र पाचक, रक्तवर्द्धक है। यह शीतलता प्रदान करती है।
*खीरा रक्त कणों का शोधन कर शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ाता है।
* परवल शरीर को ऊर्जा देता है।
*पत्तेदार सब्जी लौह तत्व से भरपूर होती है अतः इन सबका उचित रूप से सलाद में प्रयोग करें या हल्की भाप पर थोड़ी देर पकाकर कम मसाले के साथ सेवन करें।
*सब्जी को काटने से पूर्व अच्छी तरह धो लें। काटने के बाद धोने से सब्जी के तत्व नष्ट होते हैं।
* सब्जी पकाते समय ज्यादा तेल का उपयोग न करें।
* स्वाद के लालच में सब्जियों को ज्यादा देर तक आग पर न रखें। इससे उनकी पौष्टिकता नष्ट हो जाती है।
* खाने में अधिक मिर्च-मसाले का प्रयोग सब्जी के प्राकृतिक स्वाद व ऊर्जा को कम करते हैं।
*बासी, फ्रिज में रखी सब्जियों को बार-बार गरम न करें।
* हमेशा ताजी सब्जियां ही प्रयोग में लाएं।

वास्तु एवं पुरुषार्थ


अनादिकाल से ऋषि-मुनियों, आचार्यों, सरस्वती पुत्र एवं श्रेष्ठी जनों का बराबर सम्मान होता रहा है वर्तमान समय में दूरदर्शन एवं समाचार पत्रों ने वास्तु, न्यूमरोलॉजी, ज्योतिष, योगा व मेडीटेशन इत्यादि शास्रों की जानकारी जन-जन तक पहुंचा दी है। उपरोक्त सफलता पाने के लिए पूर्व जन्म का संस्कार वर्तमान समय के पुरुषार्थ एवं लगन ही हमें मंजिल पर पहुंचा सकती है। वर्तमान समय में हर तरफ शास्रों की गूंज हो रही है। श्रेष्ठी वर्ग अपने व्यापार एवं व्यवसाय में असफल होने लगता है, उन्हें अपने आफिस, फैक्टरी, निवास में त्रुटियां महसूस होने लगती है। क्या असफलता का उत्तरदायित्व वास्तु पर ही है। निम्नलिखित बातों को अपने जीवन में उतारें। सफलता क्यों न हमारे कदम चूमेगी। विश्व धर्म में भावनाओं का महत्त्व माना गया है। भावना भव नाशिनी भावना भव वंदिनी। मानव के मन में भावना की उत्पत्ति अच्छी (पोजेटिव) और बुरी (निगेटिव) कैसे होती है। भावनाएं ऊर्जाओं पर निर्भर करती है। सकारात्मक ऊर्जाओं को बुलाने के लिए वास्तु शास्र का सहयोग हम लेते हैं। मन में उत्साह लाने में अन्य कई शास्रोें का भी सहयोग लेते हैं।  सोच बदलो संसार बदल जाएगा। भावना बदलो भाव बदल जाएंगे। वास्तु शास्र आपको मार्ग दर्शन देता है। अच्छे सोच का वातावरण आपके सम्मुख लाता है।  वातावरण को ग्रहण करना और मार्ग पर चलना आपको पड़ेगा। सबको साथ लेते हुए भी पुरुषार्थ में कमजोर हैं, तो कुछ भी बदलने वाला नहीं। शास्र अनुकूल बनाए गए आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान पर सकारात्मक ऊर्जा देने के स्रोत हैं। सकारात्मक ऊर्जाओं के आगमन के मार्ग ः-
सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने में सहायक
1. ईशान कोण में अंडरग्राउंड टैंक, डीप बोरिंग, कुआं, देवस्थान, भूखंड का नीचा होना, स्थान खाली होना इत्यादि।
2. अग्नि कोण में किचन, इलेक्ट्रिक रूम व जेनरेटर इत्यादि।
3. नेऋत्य कोण में मुख्यकर्ता का शयनकक्ष, भूखंड का ऊंचा होना, शस्रगृह, तिजोरीकक्ष (मतांतर उत्तर में) इत्यादि।
4. वायव्य कोण में सेप्टीक टैंक, सीढि़यां, गेस्टरूम, लड़कियों का कमरा, शौचालय, किचन (मतांतर द्वितीय अग्निकोण) इत्यादि।
सम्पत केएस सेठी, विवेक विहार, हावड़ा