Wednesday, August 14, 2013

आपदा में उजड़े गाँवों को फिर से बसायेगा शांतिकुंज

[हरिद्वार 30 जुलाई।], शांतिकुंज प्रमुख ने घरों के प्रारूप का निरीक्षण किया 


गायत्रीतीर्थ- शांतिकुंज द्वारा उत्तराखंड के आपदा प्रभावित गाँवों को पुनः बसाने की पहल की जा रही है। इसके लिएशांतिकुंज द्वारा सीबीआरआई, दिल्ली के तकनीकी मार्गदर्शन में उन घरों का प्रारूप बना लिया गया है जो आपदा प्रभावित गाँवों में बनाये जायेंगे। आज शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं शैल जीजी नेश्रीरामपुरमशांतिकुंज में बनाये गये ऐसे घरों के प्रारूप का निरीक्षण किया और इसकी विशेषताओं की जानकारी ली। 

शांतिकुंज के निर्माण विभाग प्रभारी अभियंता गौरीशंकर सैनी ने बताया कि मकानों का यह प्रारूप बहुउद्देश्यीय है। यह लोहे के एंगलों और टीनों से बनाया जा रहा है, जो 15 से 40 वर्षों तक के लिए टिकाऊ होंगे। आवश्यकता के अनुसार एक रूम- किचन और दो रूम- किचन के मकान इनके द्वारा बनाये जा सकते हैं। परस्पर जोड़कर बच्चों के लिए विद्यालय, चिकित्सालय और सामुदायिक केन्द्रों का निर्माण भी किया जा सकता है। सामुदायिक केन्द्र इस प्रकार के होंगे जिनमें किसी भी आपदा के समय पूरे गाँव के सभी लोग वहाँ शरण ले सकें। यह मकान पहाड़ी परिस्थितियों को देखते हुए तेज हवा, बर्फबारी, तेज वर्षा, भूकम्प आदि से सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।

डॉ. प्रणव जी ने ग्रामीण घरों के प्रारूप का निरीक्षण करते हुए बताया कि आवश्यकता के अनुरूप गायत्री परिवार द्वारा 10 से 20 घरों के गाँव इन घरों द्वारा बसाये जायेंगे। राहत एवं पुनर्वास कार्यों के समय शांतिकुंज की टोलियों ने इसके लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण कर लिया है।गाँववासियों को गायत्री परिवार से बड़ी आशाएँ हैं। उनके सहयोग से वर्षा ऋतु के समापन के साथ ही गाँव बसाने का आश्वासन शांतिकुंज ने दिया है। एक मकान की औसत लागत लगभग डेढ़ लाख रुपये बतायी गयी है। 

डॉ. पण्ड्या ने केवल गाँवों को बसाने की ही नहीं, बल्कि देवभूमि की गरिमा के अनुरूप लोगों को सृजनशील, संस्कारवान, प्रगतिशील बनाने की दिशा में कार्य करने की इच्छा भी व्यक्त की। इसके लिए गाँवों में व्यसनमुक्ति, स्वावलम्बन, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जलशुद्धि जैसी आवश्यक और जनोपयोगी योजनाएँ भी गायत्री परिवार द्वारा गाँववासियों के सहयोग से आरंभ की जायेंगी। 

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