Sunday, April 21, 2013

अगर सभी अपने घर के बाहर की सफाई करें तो सारी दुनिया साफ हो जाएगी


जर्मन साफ सुथरे माने जाते हैं। भले ही वह स्विस लोगों जितने साफ नहीं हों, लेकिन वह एकदम चकाचक देशों में शामिल है। पत्रकार पेटर सूडाइक इसे जर्मनों की दीवानगी बताते हैं।


दुनिया में आम तौर पर स्विटजरलैंड सबसे साफ देश माना जाता है। इसकी सड़कें इतनी साफ होती हैं कि आप उस पर खाना रख कर खा लें। अपने पेड़ों की हमेशा काट छाट करने वाले, पहाड़ियों की चोटी साफ करने वाले और घरों के बाहर झाड़ू बुहार करने वालों से जर्मन टक्कर लें तो कैसे? या हम ऐसा कह सकते हैं कि सफाई के मामले में स्विस लोग जर्मन लोगों का चरमपंथी संस्करण हैं। हमें अपनी उपलब्धियों को दूसरों की सफाई की छाया में छिपने देने की जरूरत नहीं।

मैं योहान वोल्फगांग गोएथे को अपने पहले सबूत के तौर पर पेश करता हूं। 'सभी अगर अपने घर के बाहर की सफाई करें तो सारी दुनिया साफ हो जाएगी।' और एक बार उन्होंने कहा था कि यह सिर्फ कहावत नहीं बल्कि जर्मन अस्मिता का मुख्य सच है।

एक ओर तो वह ये कहते हैं कि आप अपना कचरा खुद साफ करें और दूसरे के काम में दखल न दें। लेकिन दूसरी ओर शायद उन्होंने यह भी कहा हो सकता है कि जर्मनों को साफ सफाई करना पसंद है। जैसा कि जर्मनी के दर्शनशास्त्री ऑटो फ्रीडरिष बोलनाऊ ने कहा था, 'जब व्यापारियों ने अपनी दुकान खोल ली हो, जब घर की औरतों ने घर को एकदम चकाचक साफ कर दिया हो और घर के सामने की सड़क भी बुहार दी हो तब जा कर लोगों को चैन की सांस आती है।'

यही सोच जर्मनी के अधिकतर इलाकों में है और कुछ इलाकों में तो बहुत ही ज्यादा, जैसे कि स्वेबिया में। यहां साफ-सफाई के लिए एक हफ्ते का सिस्टम है, केहरवोखे। यह अपार्टमेंट में चलने वाला सिस्टम है जहां हर मकान वाले की सीढ़ियां, सेलर और बाहर के रास्ता साफ करने की एक-एक बार जिम्मेदारी आती है। सबको पता होता है कि किस हफ्ते किसकी बारी है और सब पूरी कोशिश करते हैं कि वो टाइमटेबल से चलें। अधिकतर यह आराम से चलता रहता है।

हालांकि...सिर्फ सड़कें ही नहीं चमकती बल्कि कपड़े भी एकदम साफ बेदाग होने चाहिए। जब मैं बड़ा हो रहा था तब भले ही मेरे मोजे रफू करने की स्थिति तक पहुंच जाएं उन्हें रोजाना धोया जाता था। मेरी मां की पूरी कोशिश होती कि भगवान न करे कि कभी मेरा एक्सीडेंट हो जाए और मुझे ऑपरेशन टेबल पर जाना पड़े तो मेरी अंडरवीयर गंदी न हो।

अब बीयर, इसे भी जर्मन शुद्धता कानून पर खरा उतरना बहुत जरूरी है। हमें सफाई अंकों में भी बहुत पसंद है। 13 वीं सदी के एक जर्मन कवि ने, जो स्वेबिया के थे, लिखा था, 'जहां भी सूरज की रोशनी पड़ती है, सूरज की रोशनी सब शुद्घ करती है। भले ही जो भी पादरी हो, सभा हमेशा शुद्ध होती है। सभा और सूरज की रोशनी हमेशा शुद्ध होती है।'

हम जर्मनों का विश्वास है कि जब मामला शुद्धता और सफाई का हो तो इसे सीखने की कोई उम्र नहीं होती। टॉयलेट से जुड़ी ट्रेनिंग जर्मन में राइनलिषकाइट्सएरजीहुंग कहलाती है, यानी साफ सफाई की शिक्षा। तो फिर अब तुरंत हाथ धोइए...

लेख: पेटर सूडाइक/आभा मोंढे 
संपादन: महेश झा

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