Friday, May 13, 2011

धन प्राप्ति योग


आकस्मिक धन प्राप्ति से तात्पर्य है कि इनाम, भेंट, वसीयत, रेस-लॉटरी, भू-गर्भ धन, स्कॉलरशिप आदि से प्राप्त धन है। कुंडली में पंचम स्थान से इनाम, लॉटरी,  स्कॉलरशिप आदि का निर्देश मिलता है, जबकि अष्टम भाव गुप्त भू-गर्भ, वसीयत, अनसोचा या अकल्पित धन दर्शाता है। धन संपत्ति प्रारब्ध में होती है, तब ही मनुष्य उसे प्राप्त कर सकता है। भाग्यशाली लोगों को ही बिना परिश्रम के अचानक धन प्राप्त होता है, इसलिए कुंडली में नवम भाग्य भाव त्रिकोण का भी विशेष्ा महत्व है। 

इस प्रकार अचानक आकस्मिक धन-संपत्ति प्राप्ति के लिए कुंडली में द्वितीय धनभाव, एकादश लाभभाव, पंचम प्रारब्ध एवं लक्ष्मी भाव, अष्टम गुप्तधन भाव तथा नवम भाग्य भाव एवं इनके अघिपति तथा इन भावों में स्थित ग्रहों के बलाबल के आधार पर संभव है। निम्न  योगों में से अघिकतम योग वाली कुंडली आकस्मिक धन प्राप्त कराने में समर्थ पाई जाती है।

1.  धनेश अष्टम भाव में तथा अष्टमेश धन भाव में अकस्मात धन दिलाता है।

2.  लग्नेश धनभाव में तथा धनेश लग्न भाव में भी अचानक धन देता है।

3.  द्वितीय भाव का अघिपति लाभ स्थान में और लग्नेश द्वितीय भाव में होता है, तो अकस्मात धन लाभ कराता है।
4.  लाभ भाव में चंद्रम+मंगल युति व बुध पंचम भाव में स्थित होने पर अकस्मात धन लाभ होता है।

5.  अष्टम भाव में शुक्र तथा चंद्र + मंगल कुंडली के किसी भी भाव में एक साथ होते हैं, तो जातक अकस्मात धन प्राप्त करता है।

6.  भाग्यकारक गुरू यदि नवमेश होकर अष्टम भाव में है, तो जातक अकस्मात धनी बनता है।

7.  द्वितीय एवं पंचम स्थान या इनके स्वामी युति, दृष्टि या परिवर्तन योग से यदि शुभ संबंध बनाते हैं, तो लॉटरी खुलती है।

8.  कुंडली में धनभाव, पंचम भाव, एकादश भाव, नवम भाग्य भाव का किसी भी प्रकार से संबंध होता है, तो अकस्मात धन प्राप्त कराता है।

9.  पंचम, नवम या एकादश भाव में राहु-केतु होते हैं, तो लॉटरी खुलती है, क्योंकि राहु अकल्पित और अचानक फल देता है।

10.  ष्ाष्टम-अष्टम, अष्टम-नवम, एकादश-द्वादश स्थान के परिवर्तन योग आकस्मिक धन प्राप्त कराते हैं। दशा-अंतरदशा में अचानक धन प्राप्त कराते हैं।

11. अष्टम भाव स्थित धनेश जातक को जमीन में दबा हुआ, गुप्त धन प्राप्त कराता है या वसीयत द्वारा धन प्राप्त कराता है।

12.  लग्नेश-धनेश के संबंध से पैतृक संपत्ति मिलती है।

13.  लग्नेश-चतुर्थेश के संबंध से माता से संपत्ति प्राप्त होती है।

14.  लग्नेश शुभग्रह होकर यदि धनभाव में स्थित हो, तो जातक खजाना प्राप्त कर सकता है।

15.  अष्टम स्थान स्थित लाभेश अचानक धन दिलाता है।

16.  कर्क या धनु राशि का गुरू नवम भाव गत होता है और मकर का मंगल यदि कुंडली में चंद्रमा के साथ दशम भाव में होता है, तो अकस्मात धन दिलाते हैं।

17.  चंद्र-मंगल, पंचम भाव में हो और शुक्र की पंचम भाव पर दृष्टि होती है, तो जातक अचानक धन पाता है।

18.  गुरू-चंद्र की युति कर्क राशि में द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम या एकादश भाव में से किसी भी भाव में होती है, तो जातक अकस्मात धन पाता है। चंद्र से तृतीय, पंचम, दशम एवं एकादश भाव में शुभ ग्रह धन योग की रचना करते हैं।

19.  धन-संपत्ति पूर्वार्जित सतकर्मो का स्थान पंचम भाव है तथा विगत जन्म के संचित कर्मो के अनुसार ही स्त्री-पुरूष्ा, पुत्र, परिवार, धन-संपत्ति के रूप में आकर मिल जाते हैं और प्रारब्ध का निर्माण होता है।

शांता गुप्ता

1 comment:

  1. santosh pusadkar आप ने जो बताया सही है. आप को धन्यवाद करता हू .शुक्र की महादशा १३ ऑक्ट २००९ सुरु हो गायी है.कन्या लग्न कुंडली है. केतू दिव्तीय मै , शनी तृतीय ,गुरु पंचम बुध शुक्र.चंद्र सप्तम मै , रवी राहू अष्टम मै. मंगल नअवं मै है . कृपया मागदर्शन करे.

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